उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इस बार मार्च की शुरुआत से ही तेज गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। कई जगह तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुका है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 14–15 मार्च से राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, जिसके चलते धूलभरी आंधी, गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश होने की संभावना है।
मार्च में ही बढ़ी गर्मी
इस बार उत्तर भारत के कई हिस्सों में मार्च के पहले ही पखवाड़े में गर्मी ने तेजी पकड़ ली है। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में भी दिन का तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। लगातार सूखे मौसम के कारण गर्मी का प्रभाव और ज्यादा महसूस किया जा रहा है।
दिल्ली में टूटा 15 साल का रिकॉर्ड
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 11 मार्च को तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मार्च के पहले पखवाड़े में पिछले करीब 15 वर्षों में सबसे अधिक माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक गर्म और शुष्क मौसम रहने के बाद अक्सर आंधी और गरज-चमक जैसी गतिविधियां शुरू हो जाती हैं, जिससे मौसम में कुछ संतुलन बनता है।
प्री-मानसून गतिविधि की शुरुआत
मौसम विभाग के अनुसार प्री-मानसून गतिविधियों का पहला दौर 14 मार्च से उत्तर राजस्थान में शुरू होने की संभावना है। इसके बाद 15 मार्च को यह प्रभाव पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के कई हिस्सों तक फैल सकता है। अगले सप्ताह यानी 16 से 22 मार्च के बीच मौसम गतिविधियों के और तेज होने के संकेत हैं। 20 से 23 मार्च के दौरान इनका असर ज्यादा व्यापक और मजबूत हो सकता है।
आंधी, ओलावृष्टि और बिजली गिरने का खतरा
प्री-मानसून मौसम के दौरान कई बार धूलभरी आंधी, तेज हवाएं, गरज-चमक, ओलावृष्टि और बिजली गिरने जैसी स्थितियां भी बन जाती हैं। इसके बाद हल्की या मध्यम बारिश होने से वातावरण में जमी धूल साफ हो जाती है और तापमान में गिरावट के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। हालांकि तेज हवाएं और ओले फसलों व अन्य चीजों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
इन इलाकों में ज्यादा असर की संभावना
राजस्थान के गंगानगर, अनूपगढ़, हनुमानगढ़, सूरतगढ़, महाजन, पदमपुर और चूरू जैसे इलाकों में मौसम के बदलने का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। वहीं पंजाब और हरियाणा के पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, रूपनगर, चंडीगढ़, अंबाला, करनाल, हिसार, भिवानी, कुरुक्षेत्र, पानीपत और सोनीपत में भी आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है।
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 15 मार्च की शाम या रात के समय तेज हवाओं के साथ मौसम बदलने की संभावना जताई गई है। मौसम का यह पहला दौर भले ही एक-दो दिन का हो, लेकिन इसके बाद 16 से 22 मार्च के बीच फिर से सक्रिय मौसम प्रणाली देखने को मिल सकती है, जिससे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को बढ़ती गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
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